Tuesday, 18 August 2015

यहाँ तक था कलाम - काल – भारत असाधारण कृतिमानो का देश रहा है और आगे भी यह अविराम कृति जारी रहेगा । इतिहास तो कहता ही है हमारे सुर्यावान महापुरूषो की कृतिकथा , साथ ही साथ कलाम साहब जैसे कोहनूर इतिहास को जीवंत बना कर गरिमा को बरकरार रखते है ।

यहाँ तक था कलाम - काल

भारत असाधारण कृतिमानो का देश रहा है और आगे भी यह अविराम कृति जारी रहेगा इतिहास तो कहता ही है हमारे सुर्यावान महापुरूषो की कृतिकथा , साथ ही साथ कलाम साहब जैसे कोहनूर इतिहास को जीवंत बना कर गरिमा को बरकरार रखते है भारत की भू- गर्भ  में अविष्कारक ही अविष्कारक है।अपनो को खोने का दर्द सबको होता है परन्तु मृत्यु निश्चित सार्वभौमिक सत्य है, जिसको हर जीव स्वीकार करता है ।खोने पाने का खेल का तो सदीयों से चला रहा है ।लेकिन सबसे बड़ा सत्य यह भी  है कि हमारे बीच हमारे मार्गदर्शक नही रहे परंतु असंख्य प्रेरणा चलंत मार्ग छोड़ गए है और जीवन की प्रारंभिक  बाधाओं को दूर कर यह साबित कर चले कि उङने के लिए हौसले का होना अतिआवश्यक है अपनी पहाड़ के समान  समस्याओ  को भी संघर्षशील  झरना बनकर प्रगति - पथ पर अग्रसर रहे हाँ, ऐसे थे हमारे ऊर्जावान    माटी से लेकर छाती तक में बसने वाले पर परम पूज्यनीय  भारत  रत्न डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम साहब
                   
रामेश्वरम  की धरा पर अवतरित एकदम  गरीब परिवार मे लेकिन इनका परिवार प्रेरणा से  धनी और कर्मशीलता तो कूट - कूट कर भरी हुई अपने परिवार की इस परंपरा को कलाम साहब ने बङे ही दायित्व सहनशीलता से कायम रखा कलाम साहब की एक बात  " सपने वह नही जिनको हम बंद आँख से  देखते है, सपने वो है जिनके लिए हमे जागना पङता है  " और यह पँक्ति उनके अनुभव को बयाँ कर रही है क्योंकि उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए अखबार बेचा यानि कि खुद को मेहनत के लिए समर्पित कर दिये  तब जाकर उनके नाम को अमर पहचान मिला ।डॉक्टर कलाम साहब ने तो बहुत सी अनुभवी बात कही है लेकिन उनकी एक और बात मुझे याद रही है कि  " पहली सफलता प्राप्त करने के बाद खामोश मत बैठो वरना लोग दुसरी असफलता के बाद पहली सफलता का श्रेय किस्मत को दे देंगे " बहुत ही सुंदर सरल बात है लेकिन गंभीरता  भी चरम सीमा पर स्थित है और इनकी किताबो को पढ़कर समझ आता है कि इनकी कामयाबी का रहस्य क्या है और जिस मानव के इतने उत्तम विचार अविराम प्रयास हो तो भला कामयाबी उनसे दूर कैसे रह सकती है बचपन से ही धर्म के भेद भाव से दूर रहे क्योंकि रामेश्वरम  मंदिर तो उनका प्रांगण था और इससे बङा उदाहरण क्या होगा  
                
उम्र भले ही एक - एक कर के कम हो चले थे पर मन हमेशा युवा ही रहा हर बात से उनके उमंग - उत्साह  और प्रेरणा  के रस टपकते थे और  आज उनके शून्यकाल मे भी उनकी  लिखी बाते  निराश मन मे उम्मीद का चिराग ज्वलंत  कर देती है सौभाग्य है हमारा की अंतिम  समय मे भी वह हमारे लिए जाते - जाते अपना अनमोल समय न्यौछावर कर चले ।लम्बे समय से बीमार होने के बावजूद भी वह युवा पीढ़ी को कभी भी अपने ना होने का एहसास होने  दिए और जब भी मौका मिला युवाओ से मिलते रहे ।उनके कर्मो को चाहे जितना भी बखूबी से बयाँ किया जाए, कम ही होगा उम्र से ज्यादा और समय से पहले कार्य करने वाले व्यक्ति कलाम साहब ही है
                
मिसाइल मैन सफल वैज्ञानिक  हो कर भी कलाम साहब राष्ट्रपति मात्र नही बल्कि एक बेहतरीन अनुभवी  लेखक और कलाकार भी रहे और साथ ही साथ मानवता  के लिए मिशाल भी ।ऐसे व्यक्तित्व  वाले महापुरूष जन्म नही अवतार होते है लेकिन गुजरात - दंगे की चुप्पी को लेकर के जो निंदा  की जा रही है, वो अनुचित नही है क्योंकि  इनके सदगुणो के समक्ष यह सब बाते तुच्छ लगती है ।अपने समस्त सुखो को त्याग कर ही आधुनिक मिसाइल काल मे नए - नए मिसाइल दिए और अपने खोज से भारत को इक नया साहस भरा साँस ।कलाम काल का ही देन है कि आज मिसाइल जगत के लिए भारत एक मिसाल है
             
भारत रत्न डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम साहब ने भारत को कई अमिट रत्न दिए इनके कर्मो की तुलना इनके कार्यकाल  से की जाए तो समय खुद को कर्जदार समझेगा ।शिलांग की आखिरी सांस यह बता रही है की यह शख्स माटी के लिए ही बना था और रामेश्वरम की धरा का सौभाग्य है कि आखिर बार भी वह अपने आँचल  में ही सुलाएगी ।जीत और हार का  मिलन कराने वाले और साथ ही साथ बच्चे - बुजुर्ग और विरोधीयों  के दिल मे बसने वाले सुर्यावान - ऊर्जावान  इस महान शख्सियत को तो  "कलाम - काल" ही कहा जाना सर्वोत्तम होगा 


लेखक -
रवि कुमार गुप्ता " रनवीरा "
केंद्रीय विवि. उङिसा, कोरापुट 
पत्रकारिता  जन - संचार विभाग 
(
एम. . 2 वर्ष )

(Note- For your kind information- my some articles, feature stories, satire stories, stories, poems have been already published in Hindi and English newspaper and magazine  (regional and National ) and I received several awards in the field of writing. 
Thank you.

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